लापरवाही तो देखो, बारिश में खुले में पड़ा है 109 करोड़ का धान

रायपुर। बलरामपुर, रायगढ़ और जांजगीर‑चांपा जिले के संग्रहण केंद्रों में करीब 109 करोड़ का धान खुले में पड़ा हुआ है। प्रशासन के पास इन तीन जिलों में खुले में पड़े चार लाख 35 हजार 710 क्विंटल धान को सुरक्षित रखने की समुचित व्यवस्था नहीं है। कमोबेश प्रदेश के कई जिलों में यही स्थिति बनी हुई है।

बलरामपुर जिले में राइस मिल कम है, इस कारण कस्टम मिलिंग में तेजी नहीं आ पा रही है। जिले के डकवा, राजपुर और रामानुजगंज संग्रहण केंद्र में कुल दो लाख 12 हजार 714 क्विंटन धान खुले में रखा हुआ है। धान को बारिश से बचाने के लिए फटे हुए कैप कवर से ढंककर खानापूर्ति की गई है। धान से भरी ऊपर की बोरियां भीग चुकी है और बाकी में नमी आने लगी 

रायगढ़ जिले में चार धान संग्रहण केंद्र बनाए गए हैं। केवल खरसिया के केंद्र में ही धान का पूरा उठाव हो पाया है। लोहरसिंह संग्रहण केंद्र में 36 हजार क्विंटल, सारंगढ़ के हरदी में छह लाख क्विंटल और बरमकेला में भी बड़ी मात्रा में धान बचा हुआ है। इन केंद्रों से अरवा की जगह अभी केवल उसना राइस मिलिंग करने वाले मिलर्स ही उठाव कर रहे हैं। इस कारण धान का उठाव धीमी गति से हो रहा है। डीएमओ सीआर जोशी का दावा है कि जिले में बचे हुए 11 लाख क्विंटल धान का उठाव 15 दिनों में पूरा कर लिया जाएगा।

एक लाख क्विंटल धान जाम, कैप कवर फटे 

रायगढ़ जिले में अकलतरा, जांजगीर, डभरा और सक्ती में धान संग्रहण केंद्र है। इन केंद्रों में एक लाख 13 हजार क्विंटल धान जाम है। बारिश से बचाव के लिए धान की बोरियों से कैप कवर से ढंका गया था, लेकिन तेज हवा के चलते ज्यादातर कवर फट गए हैं। धान में नमी आ गई है, जिससे उनके अंकुरित होने का खतरा बढ़ गया है।

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