संतों की वाणी का प्रसाद प्रतिदिन पाटेश्वर धाम संत राम बालक दास जी द्वारा

24 मई।संत परमार्थी होते हैं। इनका सम्पूर्ण जीवन व सभी कर्म दूसरों के लिए होते हैं। जैसे स्वाति बूंद अम्बर से गिरकर सीप के मुख में गिरती है तभी सीप मोती बनाता है। जिस प्रकार चन्दन की खुशबू हवा के द्वारा वन के अन्य वृक्षों की दुर्गन्ध को बदलकर उसको भी सुगधीत कर देती है तथा सम्पूर्ण वन चन्दनमय हो जाता है उसी प्रकार संत भी परमात्मा की अमृत रूपी खुशबू को श्रद्धावान मानव के जीवन में प्रकट करके उसे सुगंधित कर देते हैं। संतों की वाणी का प्रसाद प्रतिदिन पाटेश्वर धाम संत राम बालक दास जी द्वारा, अपने ऑनलाइन सत्संग में प्रतिदिन किया जा रहा है, आज 24 मई सुबह 10:00 से 11:00, एवं दोपहर 1:00 से 2:00 सीता रसोई संचालन ग्रुप में पूज्य श्री महंत गोपाल शरण जी महाराज श्री निम्बार्क पीठ सलेमाबाद राजस्थान से सीधे जुड़े, और आचार्य पीठ और प्रातः स्मरणीय जगद्गुरु श्रीनिम्बार्काचार्य श्री श्रीजी महाराज निम्बार्क तीर्थ अजमेर राजस्थान के विषय मे सत्संग में भक्तोंको संबोधित किया
पूज्य गोपाल शरण जी महाराज, वैष्णव परंपरा के निंबार्क संप्रदाय से हैं, श्री निंबार्क संप्रदाय की विशुद्ध परंपरा में, जगतगुरु परंपरा के अंतर्गत रामानंद चार्य जी महाराज, जगद्गुरु श्री वल्लभाचार्य जी महाराज, सतगुरु श्री रामानुजाचार्य जी महाराज जगतगुरु श्री निंबार्काचार्य जी महाराज की पावन परंपरा रही है, निंबार्काचार्य पीठ से गोपाल शरण महाराज जी हैं, भागवत कथा का मंगलमय दिव्य वाचन करते हैं|
श्री निंबार्काचार्य महाराज जी का जन्म कार्तिक कृष्ण पूर्णिमा बुधवार के दिन दक्षिणांचल महाराष्ट्र के औरंगाबाद के मां गोदावरी के तट संगत मूंगी नामक ग्राम में हुआ था, इनके जन्म के पीछे भगबन का आशय रहा, जब धरती पर अधर्म बढ़ गया, आसुरी प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिलने लगा, अनाचार दुराचार पाप बढ़ने लगा तब ऋषि और गौमाता आदि के करुण पुकार से भगवान ने अपने चक्र सुदर्शन को आदेश दिया आप जाकर मनुष्य रूप में जन्म ग्रहण करो और भगवान की मनोहर भक्ति का फिर से प्रचार‑प्रसार करो, सुदर्शन चक्र नें भगवान की आज्ञा पाकर मां जयंती व अरुण ऋषि के यहां पर कर्तिक कृष्ण तिथी में जन्म लिया, जन्म अवस्था के पश्चात आपको बाल्यावस्था में निर्वाड में रखा गया जब आप थोड़े बड़े हुए तो अपने माता-पिता से ब्रजभूमि में अपनी प्रीति को बताया और बताया कि पिताजी हम जाकर वृंदावन के पावन धरती पर उपासना करना चाहते हैं माता-पिता उनकी भक्ति देखकर बहुत ही प्रसन्न हुए और मुंगी से प्रस्थान कर गोवर्धन पर्वत के निकट नीम ग्राम में निवास करने लगे, भगवान श्री अपने अनेक चमत्कार पूर्न कृत्य द्वारा जनमानस के अंदर पुनः धर्म की स्थापना करने में सफल हुए तब ब्रह्माजी ने उनकी परीक्षा लेनी चाहि और ब्रह्माजी एक सन्यासी का रूप धारण करके उनके यहां पधारे, इस प्रकार के सन्यासी थे कि सूर्यास्त के पूर्व ही भोजन, ग्रहण कर लेते थे, सूर्यास्त होने वाला था तब वे भगवान श्री के यहां नीम ग्राम मे उपस्थित हुए, भगवान जी ने उनका अतिथि सत्कार किया, चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया, सन्यासी रूप धारी जगतपिता ब्रह्मा जी ने, भगवान श्री से कहा कि उन्हें भूख लगी है भोजन चाहिए परंतु अब सूर्यास्त होने ही वाला है और भी सूर्यास्त पश्चात भोजन नहीं करते, अब भगवान श्री उनके दिव्य रूप को पहचान चुके थे, उन्होंने अपने सुदर्शन को दिव्य रूप धारण कर नीम के पेड़ पर सूरज की भांति चमकने का आदेश दिया, अंधकार की जगह सभी तरफ उजाला छा गया और ब्रह्मदेव को भोजन करवाया जैसे कि भोजन हुआ तो उन्हें अपना सुदर्शन वापस ले लिया, ब्रह्मा जी आपने कृत्य पर पछताने लगे, ये तो साक्षात सुदर्शन के अवतार है, उन्होंने ही उनका नाम निंबार्क किया, निंबार्क का अर्थ होता है जहां सूर्य ने नीम पर निवास किया , और उसी समय से निंबार्कचार्य परंपरा का पावन शुभारंभ हुआ , भगवान श्री ने प्रस्थान त्रई पर अपना सुंदर विवेचन प्रस्तुत किया, जिसमें 3 ग्रन्थ है ब्रह्म सूत्र, उपनिषद और श्री गीता जी के ऊपर भाष्य के लिखें हैं
निंबार्कचार्य जी की परंपरा सैकड़ों वर्ष की है, आपने ही सर्वप्रथम राधा-कृष्ण की युगल उपासना की, निम्बार्क परंपरा में राधा रानी कृष्ण की युगल उपासना का उल्लेख है| इस तरह पूज्य श्री गोपाल शरण जी महाराज ने सलेमाबाद राजस्थान श्री निम्बार्क पीठ से ऑनलाइन परिचर्चा में जुड़कर सबका मार्गदर्शन किया आपने बाबा राम बालक दास जी और पाटेश्वर धाम के बारे में बताया की पूज्य रामबालक दास जी को प्रयाग कुम्भ में देखा और बहुत प्रभावित हुए सरल और सामान्य रूप में रहते हुए भी बाबा राम बालक दास जी पुरे देश और विदेशों में जाकर बड़े बड़े काम कर रहे है और पुरे छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाने हेतु पाटेश्वर धाम में भारत का अद्वितीय माँ कौशल्या जन्मभूमि मंदिर का निर्माण करवा रहे है ऐसा कार्य आज भारत के बड़े बड़े आचार्य भी नही कर पा रहे है साथ ही राम बालक दास जी एक समर्पित गौ सेवक भी है
आप सभी धन्य है जिन्हें ऐसे सद्गुरु मिले है
इसके पश्चात बाबाजी से पाठक परदेसी जी बैजलपुर, ने पूछा कि संपूर्ण रामचरितमानस में तुलसीदास जी ने, केवल सुंदरकांड में ही क्यों चौपाइयों द्वारा कांड की शुरुआत की है|
संत राम बालक दास जी ने स्पष्ट किया कि, रामचरितमानस के सात कांडों में श्री राम जी के अलग अलग व्यक्तित्व का वर्णन है, बालकांड में अवतार का, अयोध्या कांड में उनका चरित्र दर्शन, अरण्यकांड में वनवास कथा, किष्किंधा कांड में मैत्री संवाद, युद्ध कांड में रावण से उनका युद्ध, उत्तरकांड में राम जी के ऐश्वर्य को व्यक्त किया गया है, परंतु सुंदरकांड ऐसा कांड है जो भगवान श्रीराम का कांड नहीं, है ये श्रीहनुमान जी का कांड है भगवान राम जी ने स्वयं स्पष्ट किया है जिसमे वे अत्री जी से संवाद करते हुए कहते हैं कि भगवान हनुमान जी का चरित्र इतना अथाह है कि मैं भी पार नहीं पा सकता|
इसीलिए सुंदरकांड जो है वह श्री हनुमान जी की कथा व्याख्या है जो सुंदर , और जो सुंदर होता है वह सरल होता है| छंद, सोरठा, श्लोक इन सबसे सरल चौपाई होती है, तुलसीदास जी ने सुंदरकांड की शुरुआत चौपाई से की, जो सरल होगा वह सुंदर ही होता है जिसने जीवन में कठिनता का धारण किया वह कभी भी सुंदर नहीं हो सकता, यह सुंदरता उसके व्यक्तित्व, उसके अनुराग, भक्ति भावना और उसके प्रभाव तेज में दिखती है, इसलिए गोस्वामी तुलसीदास जी ने सुंदरकांड की रचना सरल उपायों के अंतर्गत की है, ताकि हनुमान जी का चरित्र सभी सरलता से ग्रहण कर सके|
इस प्रकार आज का सत्संग ज्ञान पूर्ण रहा और श्री राम बालक दास जी ने बताया की सोमवार को पूज्य स्याम शरण लाटा जी कलकत्ता
मंगलवार को जगद्गुरु रामनुचार्य श्री विश्वेशप्रपन्नाचार्य जी अयोध्या
बुधवार को राष्ट्र संत कबीर साहेब श्री असंग साहेब जी नेपाल
गुरुवार को पूज्य अंतर्राष्ट्रीय कबीर संत युवाचार्य श्री अभयदास जी महाराज राजस्थान
और शुक्रवार को पूज्य साध्वी माँ प्रज्ञा भारती जी जबलपुर
इस तरह श्री पाटेश्वर धाम सीता रसोई परिवार के ऑनलाइन सत्संग में भारत के महान संतों का आगमन होगा और उनकी वाणी का प्रसाद सबको प्राप्त होगा इन्नोलैं सत्संग में जुड़ने हेतु आप पाटेश्वर धाम के वाट्सएप नंबर 9425510729 पर सम्पर्क करें

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