भोरमदेव मंदिर के गर्भगृह मे चांदी की परत हुई जीर्ण‑शीर्ण

कवर्धा छत्तीसगढ़ का खजुराहो — भोरमदेव तीर्थ प्रबंध कमेटी के सह सचिव एवं वरिष्ठ पत्रकार बृजलाल अग्रवाल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा की विगत 2 वर्षों मे स्थानीय प्रशासन द्वारा कमेटी की मीटिंग नहीं बुलाई एवं लगातार इसके दुष्परिणाम अब सामने आने लगे जो की प्रत्यक्ष देखे जा सकते है केमेटी द्वारा भगवान शंकर के शिवलिंग एवं जलहरि को चांदी की परत लगवाकर कवर किया गया था, ताकि जल मे झरण एवं भक्तों के स्पर्श से बचाया जा सके किन्तु आज यह स्थिति है की उक्त चांदी की परत के टुकड़े-टुकड़े हो गए जिससे झरण की संभावना हो गई | हनुमान जी का आधा किलो का चांदी मुकुट नदारद है |


इसी प्रकार जब तक कमेटी का हस्तक्षेप था तब तक आर्थिक स्थिति अच्छी रही उन दिनों प्रति माह 1 लाख 50 हजार की आवक थी, एवं 35 लाख रुपए बैंक मे जमा हो चुके थे | अब कोरोना के कारण आय कम होना तय है किन्तु कोरोना के पहले एवं कमेटी की उपेक्षा आय देखि जावे तो यहा की चढ़ोतरी का बंदर बाँट प्रारंभ हो गया है एवं नारियल की दर दोगुना हो गई, यहा उल्लेखनीय आवश्यक है की अनाधिकृत पुजारी को पुनः रख दिया गया जबकि इस पुजारी के रहते मंदिर की आय निरंक थी, जो रिकार्ड देखा जा सकता है वही कमेटी के द्वारा प्रतिदिन आय का रिकार्ड रजिस्टर पर देखा जा सकता है प्रसाशन चाहे तो जांच कमेटी बैठा ले ताकि मंदिर की आय सुरक्षित रखी जा सके |
इसी तरम्यान सुझाव है की देश के अन्य मंदिर मे गर्भगृह को स्पर्श कर दर्शन करने नहीं दिया जाता, गर्भगृह के पहले जो गेट है उस गेट को जाली से पैक कर दिया जाए उसी जाली के माध्यम से एक पाईप लाइन की व्यवस्था किया जाए जिससे मंदिर मे आने वाले श्रद्धालुओ के द्वारा जल को अर्पण किया जा सके |
अतः प्रसासन द्वारा शिवलिंग को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे |
खेद के साथ लिखना पड़ रहा है की पुरातत्व विभाग के कब्जे मे आने पश्चात कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं कराया गया, अपितु इनके द्वारा केयर टेकर नाम मात्र को है, अर्थात इनकी उपस्थिति एवं अनुपस्थिति नगण्य है, अधिकाँस समय या तो अनुपस्थिति रहते है, यह पुजारी का रोलअदा करते है, मड़वा महल जीता जागता उदाहरण है |
अतः कलेक्टर महोदय से अपेक्षा है की सम्पूर्ण प्रकरण पर गंभीरता से विचार कर क्षेत्रीय विधायक व प्रदेश केबिनेट मंत्री मोहम्मद अकबर एवं समिति के सदस्यों के साथ बैठक बुलाकर मंदिर हित मे कदम उठायेंगे, यहा यह बताना लाजिमी होगा की वर्षों से कार्यकरिणी कमेटी के सदस्यों को नकार राजनीति प्रभाव भी देखने को मिला है, जो की समाज के बहुत बढ़े वर्ग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है |
भोरमदेव मंदिर के परिसर (कंपॉउंड) के अंदर एवं बाहर एक बड़ा प्रोजेक्टर लगवा दिया जाए जिससे की मंदिर मे आने वाले श्रद्धालुओ को प्रोजेक्टर के माध्यम से दर्शन प्राप्त हो सके | अन्य मंदिरों की तरह भोरमदेव मंदिर की आरती को लाईव प्रसारण के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से किया जाना चाहिए |

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